CHHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ
महाराष्ट्र के शासक छत्रपति शिवाजी राजे का जन्म 1627 में शिवनेरी नगर में हुआ था। उनके पिता शहाजी भोसले थे, जो बिजापुर के सल्तनत का एक साम्राज्य थे। शिवाजी का जन्म एक योद्धा के रूप में हुआ था, उनके पिता ने उन्हें योद्धा के रूप में प्रशिक्षित किया।
शिवाजी की बचपन की कुछ घटनाओं में शामिल हैं। उन्होंने एक बार राजा की महल में बैठकर उनसे प्रश्न पूछे थे और उन्हें स्पष्ट जवाब दिए थे। राजा उनसे बहुत खुश थे और उन्हें एक छोटी सी गद्दी दी गई थी। इससे शिवाजी को राजनीति और युद्ध के बारे में सीख मिला।
शिवाजी ने अपने जीवन में बहुत सारे युद्ध लड़े। उन्होंने मुगल साम्राज्य से लड़ा और उन्हें हराया। उन्होंने बहुत से किले और शहर जीते। उन्होंने अपनी सेना को एक महान ताकत बनाया था जो अपनी जगह रखती थी। शिवाजी की सेना की एक विशेषता यह थी कि वे गुप्त युद्ध के तरीके का इस्तेमाल करते थे,
शिवाजी की पहली लड़ाई 1659 में आई थी, जब उन्होंने बिजापुर सल्तनत से लड़ाई लड़ी थी। यह लड़ाई पानीपत के युद्ध से पहले हुई थी। शिवाजी ने उस समय एक छोटी सेना के साथ सिद्धेश्वर पास में बसे एक अंग्रेजी दल को हराया था। इस जीत के बाद, शिवाजी ने अपनी सेना को बढ़ाने और स्थानीय राजाओं से सहयोग लेने के लिए काम करना शुरू किया था।
शिवाजी ने अपनी सेना को नवीनीकृत किया और एक ऐसा युद्ध विद्यालय खोला जहां युवा योद्धा सीख सकते थे। वे अपनी सेना को एक महान ताकत बनाने के लिए काम करते रहे और उन्होंने एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने के लिए योजना बनाई।
शिवाजी ने 1674 में राज्य का नाम स्वराज्य बनाया और उन्होंने अपने राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार का प्रचार किया। उन्होंने स्थानीय लोगों को योग्य अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया था जो उनके राज्य को संचालित करते थे।
शिवाजी की दूसरी लड़ाई 1660 में हुई थी, जब उन्होंने बिजापुर सल्तनत के साथ लड़ाई लड़ी थी। यह लड़ाई कुछ समय बाद हुई थी जब शिवाजी और उनके सेनापति भाजीराव गुजरे उत्तर भारत से लौट रहे थे। उन्होंने उन्हें हमला कर दिया था जिसके बाद उन्हें सफलता मिली।
इस लड़ाई में, शिवाजी ने बिजापुर सल्तनत की सेना को हराया था। उन्होंने शिवाजी और उनकी सेना के ताकत को देखते हुए बिजापुर सल्तनत को उनसे शांति संधि करनी पड़ी। इस लड़ाई के बाद, शिवाजी ने बिजापुर सल्तनत के साथ शांति संधि कर ली थी।
यह लड़ाई शिवाजी की सामरिक कुशलता को दर्शाती है। उन्होंने अपनी सेना को अभ्यास करने और बढ़ाने के लिए एक छोटे से शुरुआती सेना को जीत के बाद बढ़ावा दिया था। यह लड़ाई शिवाजी के लिए एक महत्वपूर्ण विजय थी जिसने उनकी सेना को और उनके सामरिक रूप को बढ़ाया।